विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के संरक्षक एवं मार्गदर्शक पद्मश्री श्री ब्रह्मदेव शर्मा ‘भाई जी’ ने कहा कि विद्या भारती का कार्य धर्माधारित एवं समाज निर्माण का कार्य है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए “दोनों हाथ उलीचिए, यह सज्जन का काम है”— इस पवित्र भाव के साथ समर्पणपूर्वक कार्य करते रहना चाहिए।
दिल्ली स्थित केन्द्रीय कार्यालय प्रज्ञा सदन में सरस्वती विद्या मंदिर ब्रज प्रदेश प्रकाशन के निदेशक डॉ. राम सेवक से भेंट वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि प्रकाशन कार्य निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिभावक विद्या भारती के कार्य का महत्वपूर्ण आधार हैं। प्रकाशन एवं शैक्षिक गतिविधियों में अभिभावकों के सम्मान, सहयोग और प्रोत्साहन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, जिससे वे जीवनभर संस्था के कार्य के सहयोगी और सहभागी बने रहें।

डॉ. राम सेवक ने भेंट वार्ता का उद्देश्य विद्या भारती के इतिहास एवं गतिविधियों के अभिलेखीकरण से संबंधित बताया। इस पर भाई जी ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कार्य है। विद्या भारती के गौरवशाली इतिहास का लेखन, अभिलेखीकरण एवं संरक्षण कुशल एवं अनुभवी कार्यकर्ताओं द्वारा सुव्यवस्थित ढंग से किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अभिलेखीकरण में केवल घटनाओं का संग्रह ही नहीं, बल्कि शिक्षण व्यवस्था, प्रशिक्षण, संस्कार निर्माण, सामाजिक चेतना, संगठन पद्धति, कार्यकर्ताओं के योगदान और समाज में हुए सकारात्मक परिवर्तन जैसे सभी पक्षों को समाहित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां विद्या भारती की कार्ययात्रा से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
इस अवसर पर क्षेत्रीय अभिलेखागार प्रमुख श्री कमल कुमार शर्मा, ब्रज प्रदेश अभिलेखागार के पालक अधिकारी श्री नेत्रपाल सिंह, सरस्वती शिशु मंदिर प्रकाशन मथुरा के प्रबंधक श्री हरि प्रकाश वर्मा एवं लिपिक श्री दीपक कुमार उपस्थित रहे। भाई जी ने सभी कार्यकर्ताओं को अपने कर-कमलों से प्रसाद प्रदान कर आशीर्वाद दिया।
भेंट वार्ता के उपरांत मध्य भारत, महाकौशल एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न प्रांतों की विकास यात्रा से संबंधित पत्रिकाओं का अवलोकन किया गया। इस अवसर पर विद्या भारती ब्रज प्रदेश के अभिलेखागार को अधिक व्यवस्थित, सुदृढ़ एवं विकसित करने के लिए आगामी कार्य योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।
यह भेंट वार्ता विद्या भारती के इतिहास संरक्षण, प्रकाशन कार्य की गुणवत्ता वृद्धि और संगठन की भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी दस्तावेज तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।