अंकित द्विवेदी – पूर्व छात्र (बैच 2017)
श्रीजी बाबा सरस्वरी विद्या मंदिर, मथुरा
मैं कृतज्ञता, गर्व और भावुकता के साथ लिख रहा हूँ। हाल ही में मुझे प्रधानमंत्री फेलोशिप फॉर डॉक्टोरल रिसर्च (PMFDR) से सम्मानित किया गया है। यह भारत सरकार के अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) द्वारा समर्थित एक अत्यंत प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फेलोशिप है, जो देशभर के बहुत ही सीमित शोधार्थियों को प्रदान की जाती है। इस फेलोशिप का उद्देश्य उद्योग–शिक्षा सहयोग के माध्यम से विश्वस्तरीय शोध को प्रोत्साहित करना है।
मैं श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर, मथुरा का पूर्व छात्र हूँ और यह उपलब्धि केवल मेरी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उस यात्रा का परिणाम है जिसकी शुरुआत मेरे विद्यालय के कक्षाओं से हुई थी। जिज्ञासा से प्रश्न पूछने की आदत, अलग ढंग से सोचने का साहस, तथा निरंतर परिश्रम का अनुशासन — ये सभी संस्कार मुझे अपने विद्यालय में ही प्राप्त हुए। आज भी मैं उन्हीं मूल्यों को अपने जीवन और शोध में आत्मसात करता हूँ।
मैं हृदय से गर्व अनुभव करता हूँ कि मैं विद्या मंदिर का पूर्व छात्र हूँ। मेरी पहचान, मेरे मूल्य और मेरी शैक्षणिक सोच इसी विद्यालय की देन हैं। यह उपलब्धि उस सुदृढ़ शैक्षणिक आधार का प्रतिबिंब है, जो विद्या भारती से संबद्ध विद्यालय अपने विद्यार्थियों को प्रदान करते हैं।
मेरा उद्देश्य केवल अपनी उपलब्धि साझा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही शोध और नवाचार को एक सार्थक एवं राष्ट्रनिर्माण से जुड़ा करियर विकल्प मानने के लिए प्रेरित करना है। आज भी अनेक विद्यार्थी सफलता को केवल पारंपरिक व्यवसायों से जोड़कर देखते हैं, जबकि शोध और अनुसंधान देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि मेरी यात्रा किसी एक विद्यार्थी को भी बड़े सपने देखने, जिज्ञासु बने रहने और ज्ञान की शक्ति पर विश्वास करने के लिए प्रेरित कर सके, तो मैं इसे अपने विद्यालय के प्रति अपनी छोटी-सी सेवा मानूँगा।
मेरे जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा, संस्कार और निरंतर प्रोत्साहन के लिए मैं सदैव आभारी रहूँगा। मुझे अपने विद्यालय से जुड़ा होने पर हमेशा गर्व रहेगा।
मेरा शोध कार्य 3D कंक्रीट प्रिंटिंग (3D Concrete Printing) तथा कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन एवं CCUS (Carbon Capture, Utilization and Storage) प्रौद्योगिकी पर केंद्रित है। यह शोध मैं प्रो. बिरांची पांडा, आईआईटी-गुवाहाटी के मार्गदर्शन में कर रहा हूँ। 3D कंक्रीट प्रिंटिंग एक उन्नत निर्माण तकनीक है, जिसके माध्यम से भवन एवं संरचनाओं का निर्माण स्वचालित, तीव्र, कम लागत एवं कम संसाधनों में किया जा सकता है। यह तकनीक निर्माण क्षेत्र में श्रम, समय एवं सामग्री की बचत करती है तथा अपशिष्ट (waste) को न्यूनतम करती है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित आवास निर्माण, सुदूर एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत संरचना विकास तथा “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को सशक्त बनाने में यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन एवं CCUS तकनीक का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़कर उसका सुरक्षित भंडारण अथवा पुनः उपयोग करना है। इससे वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा कम होती है, जलवायु परिवर्तन की गति नियंत्रित होती है तथा पर्यावरण संरक्षण को बल मिलता है। यदि इन दोनों तकनीकों का समन्वित उपयोग किया जाए, तो निर्माण क्षेत्र को अधिक पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत (sustainable) बनाया जा सकता है।
मेरा शोध राष्ट्र के सतत विकास, कार्बन उत्सर्जन में कमी, हरित प्रौद्योगिकी के विस्तार तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रयास है। यह न केवल भारत के लिए, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। मैं वर्तमान में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), गुवाहाटी से पीएच.डी. कर रहा हूँ।
मेरे पिता जी श्री संजीव द्विवेदी जिला सहकारी बैंक, मथुरा में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। मेरी माता श्रीमती कल्पना द्विवेदी गृहिणी हैं। मेरे भ्राता श्री अनुज द्विवेदी भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं।
विद्यालय एवं विद्या भारती परिवार द्वारा प्राप्त संस्कार, अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा की प्रेरणा ही मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। मेरा प्रयास रहेगा कि अपने शोध एवं कार्य के माध्यम से राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन कर सकूँ।

